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ramayan 4.13.24: ये वृक्ष, जिनके शिखर अग्नि के धुएँ से आवृत हैं, बादलों से आवृत नीले पर्वतों के समान चमकते हैं॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.13.24 
एते वृक्षा: प्रकाशन्ते धूमसंसक्तमस्तका:।
मेघजालप्रतिच्छन्ना वैडूर्यगिरयो यथा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ये वृक्ष, जिनके शिखर अग्नि के धुएँ से आवृत हैं, बादलों से आवृत नीले पर्वतों के समान चमकते हैं॥ 24॥
 
These trees, whose peaks are covered with the smoke of the fire, shine like blue mountains covered with clouds.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)