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ramayan 4.13.21: पक्षी और वन के अन्य जीव उसे दूर से ही त्याग देते हैं। जो लोग मोहवश उसमें प्रवेश करते हैं, वे कभी वापस नहीं लौटते॥21॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.13.21 
पक्षिणो वर्जयन्त्येतत् तथान्ये वनचारिण:।
विशन्ति मोहाद् येऽप्यत्र न निवर्तन्ति ते पुन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पक्षी और वन के अन्य जीव उसे दूर से ही त्याग देते हैं। जो लोग मोहवश उसमें प्रवेश करते हैं, वे कभी वापस नहीं लौटते॥21॥
 
‘Birds and other forest creatures abandon it from a distance. Those who enter it out of fascination never return.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)