श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.13.20 
तेषामेतत्प्रभावेण द्रुमप्राकारसंवृतम्।
आश्रमं सुदुराधर्षमपि सेन्द्रै: सुरासुरै:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'उनके प्रभाव से घने वृक्षों से घिरा यह आश्रम इन्द्र सहित समस्त देवताओं तथा दैत्यों के लिए अत्यंत दुर्गम हो गया है।
 
‘Due to their influence this ashram surrounded by dense trees has become extremely difficult for all the gods including Indra and also for the demons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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