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ramayan 4.13.2: सोने से मण्डित विशाल धनुष उठाकर, सूर्य के समान तेजस्वी तथा युद्ध में सफलता दिखाने वाले बाणों से सुसज्जित होकर श्री रामजी वहाँ से चले गए॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.13.2 
समुद्यम्य महच्चापं राम: काञ्चनभूषितम्।
शरांश्चादित्यसंकाशान् गृहीत्वा रणसाधकान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
सोने से मण्डित विशाल धनुष उठाकर, सूर्य के समान तेजस्वी तथा युद्ध में सफलता दिखाने वाले बाणों से सुसज्जित होकर श्री रामजी वहाँ से चले गए॥ 2॥
 
Picking up his huge bow adorned with gold and armed with his arrows which were as radiant as the sun and showed success in war, Sri Rama departed from there.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)