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ramayan 4.13.19: सात दिन और सात रातें व्यतीत करके वह केवल वायु का आहार करता रहा और एक स्थान पर स्थिर रहा। इस प्रकार सात सौ वर्षों तक तपस्या करने के बाद वह सशरीर स्वर्ग को गया॥19॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.13.19 
सप्तरात्रे कृताहारा वायुनाचलवासिन:।
दिवं वर्षशतैर्याता: सप्तभि: सकलेवरा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सात दिन और सात रातें व्यतीत करके वह केवल वायु का आहार करता रहा और एक स्थान पर स्थिर रहा। इस प्रकार सात सौ वर्षों तक तपस्या करने के बाद वह सशरीर स्वर्ग को गया॥19॥
 
‘After spending seven days and seven nights, he ate only air and remained motionless in one place. Thus, after performing penance for seven hundred years, he went to heaven in his physical body.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)