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ramayan 4.13.18: इस आश्रम में सप्तजन नाम से प्रसिद्ध सात ऋषि रहते थे, जो कठोर व्रतों का पालन करते थे। वे सिर नीचे करके तपस्या करते थे। वे नियमानुसार जल में शयन करते थे।॥18॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.13.18 
अत्र सप्तजना नाम मुनय: संशितव्रता:।
सप्तैवासन्नध:शीर्षा नियतं जलशायिन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस आश्रम में सप्तजन नाम से प्रसिद्ध सात ऋषि रहते थे, जो कठोर व्रतों का पालन करते थे। वे सिर नीचे करके तपस्या करते थे। वे नियमानुसार जल में शयन करते थे।॥18॥
 
‘In this ashram lived seven sages known as Saptajan, who were devoted to following strict vows. They used to perform penance by keeping their heads down. They used to sleep in water as per the rules.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)