Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.13.17: 'रघुनंदन! यह एक विशाल आश्रम है, जो सबके श्रम का निवारण करता है। यह बाग-बगीचों से भरा हुआ है। यहाँ स्वादिष्ट फल, कंद-मूल और जल सहज ही उपलब्ध हैं।' | ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'रघुनंदन! यह एक विशाल आश्रम है, जो सबके श्रम का निवारण करता है। यह बाग-बगीचों से भरा हुआ है। यहाँ स्वादिष्ट फल, कंद-मूल और जल सहज ही उपलब्ध हैं।'
‘Raghunandan! This is a huge ashram, which relieves everyone's labour. It is full of gardens and orchards. Delicious fruits, roots and water are easily available here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥