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ramayan 4.13.16: महात्मा रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सुग्रीव चलते-चलते उनसे उस विशाल वन के विषय में कहने लगे।   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.13.16 
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मन:।
गच्छन् नेवाचचक्षेऽथ सुग्रीवस्तन्महद् वनम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महात्मा रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सुग्रीव चलते-चलते उनसे उस विशाल वन के विषय में कहने लगे।
 
Having heard these words of Mahatma Raghunathji, Sugreeva, while walking, began telling him about that huge forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)