vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना
»
श्लोक 16
श्लोक
4.13.16
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मन:।
गच्छन् नेवाचचक्षेऽथ सुग्रीवस्तन्महद् वनम्॥ १६॥
अनुवाद
महात्मा रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सुग्रीव चलते-चलते उनसे उस विशाल वन के विषय में कहने लगे।
Having heard these words of Mahatma Raghunathji, Sugreeva, while walking, began telling him about that huge forest.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd