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ramayan 4.13.14: 'वानरों! यह वृक्षों का समूह क्या है जो आकाश में मेघ के समान चमक रहा है? यह इतना विशाल है कि मेघ के समान फैल रहा है। इसके दोनों ओर केले के वृक्ष लगे हुए हैं, जिन्होंने इस सम्पूर्ण वृक्ष समूह को घेर रखा है॥14॥   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.13.14 
एष मेघ इवाकाशे वृक्षषण्ड: प्रकाशते।
मेघसंघातविपुल: पर्यन्तकदलीवृत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'वानरों! यह वृक्षों का समूह क्या है जो आकाश में मेघ के समान चमक रहा है? यह इतना विशाल है कि मेघ के समान फैल रहा है। इसके दोनों ओर केले के वृक्ष लगे हुए हैं, जिन्होंने इस सम्पूर्ण वृक्ष समूह को घेर रखा है॥14॥
 
‘King of monkeys! What is this group of trees that is shining like a cloud in the sky? It is so vast that it is spreading like a cloud. Banana trees are planted on its sides, which have surrounded the entire group of trees.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)