श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.12.8 
सेन्द्रानपि सुरान् सर्वांस्त्वं बाणै: पुरुषर्षभ।
समर्थ: समरे हन्तुं किं पुनर्वालिनं प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पुरुषप्रवर! प्रभु! आप युद्ध में अपने बाणों से इन्द्र सहित समस्त देवताओं को मार डालने में समर्थ हैं। फिर आपके लिए बालि को मारना क्या बड़ी बात है? 8॥
 
‘Purushpravar! Lord! You are capable of killing all the gods including Indra in battle with your arrows. Then is it a big deal for you to kill Vali? 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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