श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.12.7 
इदं चोवाच धर्मज्ञं कर्मणा तेन हर्षित:।
रामं सर्वास्त्रविदुषां श्रेष्ठं शूरमवस्थितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के उस महान् कार्य से अत्यन्त प्रसन्न होकर उन्होंने सामने खड़े हुए समस्त शस्त्र विशेषज्ञों में परम धर्मात्मा एवं वीर योद्धा श्री रामचन्द्रजी से इस प्रकार कहा- 7॥
 
Very pleased with that great deed of Shri Ram, he said thus to Shri Ramchandra, the most religious and brave warrior among all the weapons experts standing in front - 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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