Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.6: साथ ही, उसके मन में बड़ी प्रसन्नता हुई। सुग्रीव ने हाथ जोड़कर, भूमि पर सिर टेककर श्री रघुनाथजी को दण्डवत् प्रणाम किया। प्रणाम करते समय, उनका हार और अन्य आभूषण लटकते हुए दिखाई दिए। | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मूर्ध्ना न्यपतद् भूमौ प्रलम्बीकृतभूषण:।
सुग्रीव: परमप्रीतो राघवाय कृताञ्जलि:॥ ६॥
अनुवाद
साथ ही, उसके मन में बड़ी प्रसन्नता हुई। सुग्रीव ने हाथ जोड़कर, भूमि पर सिर टेककर श्री रघुनाथजी को दण्डवत् प्रणाम किया। प्रणाम करते समय, उनका हार और अन्य आभूषण लटकते हुए दिखाई दिए।
At the same time, he felt very happy in his heart. Sugreeva folded his hands and bowed his head on the ground and prostrated before Shri Raghunathji. While bowing down to pay his respects, his necklace and other ornaments were visible hanging.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥