vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना
»
श्लोक 5
श्लोक
4.12.5
तान् दृष्ट्वा सप्त निर्भिन्नान् सालान् वानरपुङ्गव:।
रामस्य शरवेगेन विस्मयं परमं गत:॥ ५॥
अनुवाद
भगवान राम के बाण के बल से उन सात शाल वृक्षों को छिन्न-भिन्न होते देख, वानरराज सुग्रीव को बड़ा आश्चर्य हुआ।
Seeing those seven sal trees being pierced by the force of Lord Rama's arrow, Sugreeva, the chief of the monkeys, was astonished.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×