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ramayan 4.12.5: भगवान राम के बाण के बल से उन सात शाल वृक्षों को छिन्न-भिन्न होते देख, वानरराज सुग्रीव को बड़ा आश्चर्य हुआ।   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.12.5 
तान् दृष्ट्वा सप्त निर्भिन्नान् सालान् वानरपुङ्गव:।
रामस्य शरवेगेन विस्मयं परमं गत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भगवान राम के बाण के बल से उन सात शाल वृक्षों को छिन्न-भिन्न होते देख, वानरराज सुग्रीव को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Seeing those seven sal trees being pierced by the force of Lord Rama's arrow, Sugreeva, the chief of the monkeys, was astonished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)