श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.12.42 
विभ्राजमानो वपुषा रामवाक्यसमाहित:।
जगाम सह रामेण किष्किन्धां पुनराप स:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के वचनों से आश्वासन पाकर उनके सुन्दर शरीर से सुशोभित सुग्रीव पुनः श्री रघुनाथजी के साथ किष्किन्धापुरी पहुँचे॥42॥
 
After getting assurance from Shri Ram's words, Sugriva, who was adorned with his beautiful body, again reached Kishkindhapuri with Shri Raghunathji. 42॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे द्वादश: सर्ग:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें बारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १२॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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