Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.39: (सुग्रीव से ऐसा कहकर श्री रामचन्द्रजी ने लक्ष्मण से कहा-) 'लक्ष्मण! यह उत्तम गुणों वाली गजपुष्पीय लता खिल रही है। तुम इसे तोड़कर महामनस्वी सुग्रीव के गले में डाल दो।' | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गजपुष्पीमिमां फुल्लामुत्पाटॺ शुभलक्षणाम्।
कुरु लक्ष्मण कण्ठेऽस्य सुग्रीवस्य महात्मन:॥ ३९॥
अनुवाद
(सुग्रीव से ऐसा कहकर श्री रामचन्द्रजी ने लक्ष्मण से कहा-) 'लक्ष्मण! यह उत्तम गुणों वाली गजपुष्पीय लता खिल रही है। तुम इसे तोड़कर महामनस्वी सुग्रीव के गले में डाल दो।'
(After saying this to Sugreeva, Shri Ramchandraji said to Lakshmana -) 'Laxmana! This Gajapushpilya creeper with excellent characteristics is blooming. You pluck it and put it around the neck of the great-minded Sugreeva.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥