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ramayan 4.12.38: वानरों के राजा! तुम्हें अपनी पहचान के लिए कोई चिन्ह धारण करना चाहिए, ताकि जब हम द्वन्द्वयुद्ध में उतरें तो मैं तुम्हें पहचान सकूँ।'   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.12.38 
अभिज्ञानं कुरुष्व त्वमात्मनो वानरेश्वर।
येन त्वामभिजानीयां द्वन्द्वयुद्धमुपागतम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वानरों के राजा! तुम्हें अपनी पहचान के लिए कोई चिन्ह धारण करना चाहिए, ताकि जब हम द्वन्द्वयुद्ध में उतरें तो मैं तुम्हें पहचान सकूँ।'
 
Lord of the monkeys! You should wear some mark to identify yourself, so that I may recognise you when we engage in a duel.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)