श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.12.37 
एतन्मुहूर्ते तु मया पश्य वालिनमाहवे।
निरस्तमिषुणैकेन चेष्टमानं महीतले॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
‘इसी क्षण तुम मेरे एक ही बाण से घायल होकर वालि को भूमि पर गिरते हुए देखोगे॥37॥
 
‘In this very moment you will see Vali falling on the ground after being hit by a single arrow of mine.॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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