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श्लोक 4.12.34  |
त्वयि वीर विपन्ने हि अज्ञानाल्लाघवान्मया।
मौढॺं च मम बाल्यं च ख्यापितं स्यात् कपीश्वर॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| 'वीर! हे वानरराज! यदि तुम अनजाने में अथवा जल्दबाजी में मेरे बाण से मारे जाते, तो मेरी बालसुलभ चंचलता और मूर्खता सिद्ध हो जाती। |
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| ‘Valiant! O King of Monkeys! If you had been killed by my arrow unknowingly or in haste, then my childish fickleness and stupidity would have been proved. |
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