श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.12.34 
त्वयि वीर विपन्ने हि अज्ञानाल्लाघवान्मया।
मौढॺं च मम बाल्यं च ख्यापितं स्यात् कपीश्वर॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'वीर! हे वानरराज! यदि तुम अनजाने में अथवा जल्दबाजी में मेरे बाण से मारे जाते, तो मेरी बालसुलभ चंचलता और मूर्खता सिद्ध हो जाती।
 
‘Valiant! O King of Monkeys! If you had been killed by my arrow unknowingly or in haste, then my childish fickleness and stupidity would have been proved.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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