Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.33: मेरा वह भयंकर बाण शत्रु के प्राण लेने के लिए था, इसलिए तुम दोनों की समानता पर संदेह करके मैंने वह बाण नहीं छोड़ा। मैंने सोचा, कहीं ऐसा न हो कि हम दोनों का मुख्य उद्देश्य ही नष्ट हो जाए।' | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवितान्तकरं घोरं सादृश्यात् तु विशङ्कित:।
मूलघातो न नौ स्याद्धि द्वयोरिति कृतो मया॥ ३३॥
अनुवाद
मेरा वह भयंकर बाण शत्रु के प्राण लेने के लिए था, इसलिए तुम दोनों की समानता पर संदेह करके मैंने वह बाण नहीं छोड़ा। मैंने सोचा, कहीं ऐसा न हो कि हम दोनों का मुख्य उद्देश्य ही नष्ट हो जाए।'
That dreadful arrow of mine was meant to take the life of the enemy, therefore, being suspicious of the similarity between the two of you, I did not release that arrow. I thought, lest the main objective of both of us gets destroyed.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥