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श्लोक 4.12.31  |
स्वरेण वर्चसा चैव प्रेक्षितेन च वानर।
विक्रमेण च वाक्यैश्च व्यक्तिं वां नोपलक्षये॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| मैं तुम दोनों में वाणी, कान्ति, दृष्टि, पराक्रम और वाणी में भी कोई भेद नहीं देखता॥31॥ |
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| ‘I do not see any difference between you two even in voice, radiance, sight, prowess and speech.॥ 31॥ |
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