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ramayan 4.12.31: मैं तुम दोनों में वाणी, कान्ति, दृष्टि, पराक्रम और वाणी में भी कोई भेद नहीं देखता॥31॥   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.12.31 
स्वरेण वर्चसा चैव प्रेक्षितेन च वानर।
विक्रमेण च वाक्यैश्च व्यक्तिं वां नोपलक्षये॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम दोनों में वाणी, कान्ति, दृष्टि, पराक्रम और वाणी में भी कोई भेद नहीं देखता॥31॥
 
‘I do not see any difference between you two even in voice, radiance, sight, prowess and speech.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)