श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.12.29 
सुग्रीव श्रूयतां तात क्रोधश्च व्यपनीयताम्।
कारणं येन बाणोऽयं स मया न विसर्जित:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पिता सुग्रीव! मेरी बात सुनो, अपने मन से क्रोध निकाल दो। मैं तुम्हें बाण न चलाने का कारण बताता हूँ।
 
Father Sugreeva! Listen to me, remove anger from your mind. I will tell you the reason why I did not shoot the arrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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