श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.12.28 
तस्य चैवं ब्रुवाणस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
करुणं दीनया वाचा राघव: पुनरब्रवीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब महाबली सुग्रीव विनीत स्वर में ऐसी दयनीय बातें कहने लगे, तब श्री रामजी पुनः उनसे बोले-॥28॥
 
When the great Sugreeva started saying such pitiful things in a humble tone, then Shri Ram again spoke to him -॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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