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ramayan 4.12.26-27: ‘रघुनंदन! आपने अपना पराक्रम दिखाकर मुझे यह कहकर विदा किया कि जाओ और वालि को युद्ध के लिए ललकारो। यह सब होने पर आप शत्रुओं से पिट गए और स्वयं छिप गए। बताओ, इस समय आपने ऐसा क्यों किया? आपको उसी समय सत्य कह देना चाहिए था कि मैं वालि को नहीं मारूँगा। ऐसी स्थिति में मैं यहाँ से उसके पास नहीं जाता।’॥26-27॥   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  4.12.26-27 
आह्वयस्वेति मामुक्त्वा दर्शयित्वा च विक्रमम्।
वैरिणा घातयित्वा च किमिदानीं त्वया कृतम्॥ २६॥
तामेव वेलां वक्तव्यं त्वया राघव तत्त्वत:।
वालिनं न निहन्मीति ततो नाहमितो व्रजे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘रघुनंदन! आपने अपना पराक्रम दिखाकर मुझे यह कहकर विदा किया कि जाओ और वालि को युद्ध के लिए ललकारो। यह सब होने पर आप शत्रुओं से पिट गए और स्वयं छिप गए। बताओ, इस समय आपने ऐसा क्यों किया? आपको उसी समय सत्य कह देना चाहिए था कि मैं वालि को नहीं मारूँगा। ऐसी स्थिति में मैं यहाँ से उसके पास नहीं जाता।’॥26-27॥
 
‘Raghunandan! You showed your valour and sent me away saying that go and challenge Vali for battle, after all this was done you got beaten up by the enemy and yourself hid. Tell me, why did you do this at this time? You should have told the truth at that time itself that I will not kill Vali. In such a condition I would not have gone to him from here.’॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)