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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना
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श्लोक 25
श्लोक
4.12.25
तं समीक्ष्यागतं रामं सुग्रीव: सहलक्ष्मणम्।
ह्रीमान् दीनमुवाचेदं वसुधामवलोकयन्॥ २५॥
अनुवाद
श्री रामजी को लक्ष्मण सहित आते देख सुग्रीव बहुत लज्जित हुआ और पृथ्वी की ओर देखकर करुण वाणी में उनसे बोला -॥25॥
Seeing Sri Rama arriving with Lakshmana, Sugreeva felt very ashamed and looking towards the earth he spoke to him in a pitiable voice -॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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