vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना
»
श्लोक 23
श्लोक
4.12.23
तं प्रविष्टं वनं दृष्ट्वा वाली शापभयात् तत:।
मुक्तो ह्यसि त्वमित्युक्त्वा स निवृत्तो महाबल:॥ २३॥
अनुवाद
जब महाबली ने सुग्रीव को वन में प्रवेश करते देखा तो वह शाप के भय से वहाँ नहीं गया और यह कहकर लौट आया कि, 'जाओ, तुम बच गए।'
When Mahabali saw Sugreeva enter the forest, he did not go there out of fear of the curse and returned saying, 'Go, you are saved.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×