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ramayan 4.12.21: इसी बीच बालि ने सुग्रीव के पैर उखाड़ लिए और अपने रक्षक श्री रघुनाथजी को न देखकर ऋष्यमूक पर्वत की ओर भागा।   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.12.21 
एतस्मिन्नन्तरे भग्न: सुग्रीवस्तेन वालिना।
अपश्यन् राघवं नाथमृष्यमूकं प्रदुद्रुवे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच बालि ने सुग्रीव के पैर उखाड़ लिए और अपने रक्षक श्री रघुनाथजी को न देखकर ऋष्यमूक पर्वत की ओर भागा।
 
Meanwhile Vali pulled out Sugreeva's feet. Not seeing his protector Shri Raghunathji, he ran towards Rishyamuk mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)