Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.2: दूसरों को सम्मान देने वाले श्री रघुनाथजी ने वह भयंकर धनुष और बाण लिया और धनुष की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान करते हुए शाल वृक्ष की ओर बाण चलाया॥ 2॥ | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गृहीत्वा धनुर्घोरं शरमेकं च मानद:।
सालमुद्दिश्य चिक्षेप पूरयन् स रवैर्दिश:॥ २॥
अनुवाद
दूसरों को सम्मान देने वाले श्री रघुनाथजी ने वह भयंकर धनुष और बाण लिया और धनुष की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान करते हुए शाल वृक्ष की ओर बाण चलाया॥ 2॥
Sri Raghunath, who gives respect to others, took that fearsome bow and an arrow and making all directions resound with the sound of the bow, shot the arrow towards the sal tree.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥