Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.12.19: उसी समय श्री रामचन्द्रजी ने अपना धनुष हाथ में लेकर उन दोनों की ओर देखा। वे दोनों वीर अश्विनीकुमारों के समान एक-दूसरे के समान प्रतीत हो रहे थे। | ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसी समय श्री रामचन्द्रजी ने अपना धनुष हाथ में लेकर उन दोनों की ओर देखा। वे दोनों वीर अश्विनीकुमारों के समान एक-दूसरे के समान प्रतीत हो रहे थे।
At that very moment, Shri Ramchandraji took his bow in his hand and looked at them both. They both looked similar to each other like the brave Ashwinikumars.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥