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ramayan 4.12.16: अपने भाई की गर्जना सुनकर महाबली वालि अत्यंत क्रोधित हो गया। क्रोध में भरकर वह बड़ी तेजी से घर से बाहर निकल गया, मानो सूर्य क्षितिज से अस्त हो रहा हो।   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.12.16 
तं श्रुत्वा निनदं भ्रातु: क्रुद्धो वाली महाबल:।
निष्पपात सुसंरब्धो भास्करोऽस्ततटादिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई की गर्जना सुनकर महाबली वालि अत्यंत क्रोधित हो गया। क्रोध में भरकर वह बड़ी तेजी से घर से बाहर निकल गया, मानो सूर्य क्षितिज से अस्त हो रहा हो।
 
Hearing the roar of his brother, the mighty Vali became very angry. Filled with anger, he left the house with great speed like the sun going down from the horizon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)