श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.12.14 
सर्वे ते त्वरितं गत्वा किष्किन्धां वालिन: पुरीम्।
वृक्षैरात्मानमावृत्य ह्यतिष्ठन् गहने वने॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सब लोग वालि की राजधानी किष्किन्धपुरी में गए और वहाँ घने वन में वृक्षों के पीछे छिपकर खड़े हो गए ॥14॥
 
Thereafter all of them went to Kishkindapuri, the capital of Vali, and stood there hiding behind the trees in a dense forest. ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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