Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.12.11: ककुत्स्थकुलभूषण! मैं हाथ जोड़ता हूँ। मुझे प्रसन्न करने के लिए आज ही उस बालि को मार डालिए, जो भाई के रूप में मेरा शत्रु है।॥11॥   |   ramayan सर्ग 4.12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.12.11 
तमद्यैव प्रियार्थं मे वैरिणं भ्रातृरूपिणम्।
वालिनं जहि काकुत्स्थ मया बद्धोऽयमञ्जलि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थकुलभूषण! मैं हाथ जोड़ता हूँ। मुझे प्रसन्न करने के लिए आज ही उस बालि को मार डालिए, जो भाई के रूप में मेरा शत्रु है।॥11॥
 
Kakutsthakulbhushan! I fold my hands. To please me today itself, please kill that Vali who is my enemy in the form of a brother.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)