श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.12.10 
अद्य मे विगत: शोक: प्रीतिरद्य परा मम।
सुहृदं त्वां समासाद्य महेन्द्रवरुणोपमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आज मेरे सारे दुःख दूर हो गए हैं, क्योंकि मैंने आपको अपना मित्र पाया है, जो महेन्द्र और वरुण के समान पराक्रमी है। आज मैं बहुत प्रसन्न हूँ॥ 10॥
 
Today all my sorrows have vanished as I have found you as my friend, who is as valiant as Mahendra and Varuna. Today I am very happy.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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