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श्लोक 4.12.1  |
एतच्च वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य सुभाषितम्।
प्रत्ययार्थं महातेजा रामो जग्राह कार्मुकम्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| सुग्रीव के द्वारा कहे गए इन सुन्दर वचनों को सुनकर महाबली भगवान् राम ने उन्हें आश्वस्त करने के लिए अपना धनुष हाथ में ले लिया॥1॥ |
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| Having heard these words spoken beautifully by Sugreeva, the mighty Lord Rama took up his bow in his hand to reassure him.॥ 1॥ |
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