श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 12: सुग्रीव का किष्किन्धा में आकर वाली को ललकारना और युद्ध में पराजित होना, वहाँ श्रीराम का पहचान के लिये गजपुष्पीलता डालकर उन्हें पुनः युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.12.1 
एतच्च वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य सुभाषितम्।
प्रत्ययार्थं महातेजा रामो जग्राह कार्मुकम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के द्वारा कहे गए इन सुन्दर वचनों को सुनकर महाबली भगवान् राम ने उन्हें आश्वस्त करने के लिए अपना धनुष हाथ में ले लिया॥1॥
 
Having heard these words spoken beautifully by Sugreeva, the mighty Lord Rama took up his bow in his hand to reassure him.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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