Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.93: जैसे समस्त ज्योतियों में सूर्यदेव सर्वदा श्रेष्ठ हैं, जैसे महान पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है और जैसे समस्त चौपायों में सिंह श्रेष्ठ है, वैसे ही पराक्रम की दृष्टि से तुम समस्त मनुष्यों में श्रेष्ठ हो॥॥93॥ | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा हि तेज:सु वर: सदारवि-
र्यथा हि शैलो हिमवान् महाद्रिषु।
यथा चतुष्पात्सु च केसरी वर-
स्तथा नराणामसि विक्रमे वर:॥ ९३॥
अनुवाद
जैसे समस्त ज्योतियों में सूर्यदेव सर्वदा श्रेष्ठ हैं, जैसे महान पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है और जैसे समस्त चौपायों में सिंह श्रेष्ठ है, वैसे ही पराक्रम की दृष्टि से तुम समस्त मनुष्यों में श्रेष्ठ हो॥॥93॥
‘Just as the Sun God is always the best among all the lights, just as the Himalayas are the best among the great mountains and just as the lion is the best among all the four-legged animals, in the same way you are the best among all the human beings in terms of valour.’॥ 93॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकादश: सर्ग: ॥ १ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें ग्यारहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥