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ramayan 4.11.89: अतः हे श्री राम! इस शव को फेंक देने पर भी यह निश्चय नहीं हो सकता कि आपका बल अधिक है या उनका; क्योंकि वह शव गीला था और यह सूखा है। इन दोनों अवस्थाओं में बहुत बड़ा अन्तर है। 89।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  4.11.89 
नात्र शक्यं बलं ज्ञातुं तव वा तस्य वाधिकम्।
आर्द्रं शुष्कमिति ह्येतत् सुमहद् राघवान्तरम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
अतः हे श्री राम! इस शव को फेंक देने पर भी यह निश्चय नहीं हो सकता कि आपका बल अधिक है या उनका; क्योंकि वह शव गीला था और यह सूखा है। इन दोनों अवस्थाओं में बहुत बड़ा अन्तर है। 89।
 
‘Therefore, Shri Ram! Even after throwing this corpse, it cannot be ascertained whether your strength is greater or his; because that corpse was wet and this one is dry. There is a huge difference between these two states. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)