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ramayan 4.11.88: परन्तु हे रघुनन्दन! इस समय यह मांस रहित होने के कारण तिनके के समान हल्का हो गया है और आपने हर्ष और उत्साह के साथ इसे फेंक दिया है।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  4.11.88 
लघु: सम्प्रति निर्मांसस्तृणभूतश्च राघव।
क्षिप्त एवं प्रहर्षेण भवता रघुनन्दन॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे रघुनन्दन! इस समय यह मांस रहित होने के कारण तिनके के समान हल्का हो गया है और आपने हर्ष और उत्साह के साथ इसे फेंक दिया है।
 
But, O Raghunandan! At this time, due to being devoid of meat, it has become as light as a straw and you have thrown it with joy and enthusiasm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)