Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.11.87: मित्र! मेरा भाई वालि उस समय युद्ध से थका हुआ और मदोन्मत्त था और दुंदुभि का शरीर रक्त से लथपथ, मांस से भरा हुआ और नया था। इसी अवस्था में उसने पूर्वकाल में इस शरीर को त्याग दिया था।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  4.11.87 
आर्द्र: समांस: प्रत्यग्र: क्षिप्त: काय: पुरा सखे।
परिश्रान्तेन मत्तेन भ्रात्रा मे वालिना तदा॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
मित्र! मेरा भाई वालि उस समय युद्ध से थका हुआ और मदोन्मत्त था और दुंदुभि का शरीर रक्त से लथपथ, मांस से भरा हुआ और नया था। इसी अवस्था में उसने पूर्वकाल में इस शरीर को त्याग दिया था।
 
Friend! My brother Vali was at that time intoxicated and tired from the war and Dundubhi's body was soaked in blood, full of flesh and was new. In this condition he had thrown this body away in the past. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)