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ramayan 4.11.82: महात्मा सुग्रीव की यह बात सुनकर भगवान् श्री राम पहले तो मुस्कुराये, फिर वानर के प्रश्न का उत्तर देते हुए उससे बोले-॥82॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  4.11.82 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य महात्मन:।
स्मितपूर्वमथो राम: प्रत्युवाच हरिं प्रति॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
महात्मा सुग्रीव की यह बात सुनकर भगवान् श्री राम पहले तो मुस्कुराये, फिर वानर के प्रश्न का उत्तर देते हुए उससे बोले-॥82॥
 
Hearing this from Mahatma Sugreeva, Lord Shri Ram first smiled. Then, while answering the monkey's question, he said to him -॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)