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ramayan 4.11.81: रघुनन्दन! आपके वचन मेरे लिए निश्चय ही प्रामाणिक हैं, विश्वसनीय हैं; क्योंकि आपका धैर्य और दिव्य रूप आदि आपके उत्तम तेज को दर्शाते हैं, जैसे राख से ढकी हुई अग्नि।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  4.11.81 
कामं राघव ते वाणी प्रमाणं धैर्यमाकृति:।
सूचयन्ति परं तेजो भस्मच्छन्नमिवानलम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! आपके वचन मेरे लिए निश्चय ही प्रामाणिक हैं, विश्वसनीय हैं; क्योंकि आपका धैर्य और दिव्य रूप आदि आपके उत्तम तेज को दर्शाते हैं, जैसे राख से ढकी हुई अग्नि।
 
Raghunandan! Your words are certainly authentic for me; they are trustworthy; because your patience and your divine form etc. indicate your excellent brilliance, like a fire covered with ashes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)