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ramayan 4.11.8: वह विशाल, दुष्ट दैत्य अपने बल के अभिमान में पूर्ण होकर, प्राप्त वरदान से मोहित होकर नदियों के स्वामी समुद्र के पास गया।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.11.8 
स वीर्योत्सेकदुष्टात्मा वरदानेन मोहित:।
जगाम स महाकाय: समुद्रं सरितां पतिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह विशाल, दुष्ट दैत्य अपने बल के अभिमान में पूर्ण होकर, प्राप्त वरदान से मोहित होकर नदियों के स्वामी समुद्र के पास गया।
 
That huge, evil demon, full of pride of his power, fascinated by the boon he had received, went to the ocean, the lord of rivers. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)