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ramayan 4.11.79: किन्तु हे रघुनन्दनपुत्र! मैं उस शक्तिशाली दुष्ट भाई के पराक्रम को जानता हूँ, किन्तु युद्धभूमि में तुम्हारा पराक्रम मैंने नहीं देखा।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  4.11.79 
किं तु तस्य बलज्ञोऽहं दुर्भ्रातुर्बलशालिन:।
अप्रत्यक्षं तु मे वीर्यं समरे तव राघव॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
किन्तु हे रघुनन्दनपुत्र! मैं उस शक्तिशाली दुष्ट भाई के पराक्रम को जानता हूँ, किन्तु युद्धभूमि में तुम्हारा पराक्रम मैंने नहीं देखा।
 
But, son of Raghunandan! I know the might and prowess of that powerful evil brother but I have not seen your prowess on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)