Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.77: ये हनुमान् आदि मेरे सचिव मुझ पर बहुत स्नेह करते हैं। इनके साथ रहते हुए भी मैं इस विशाल वन में चिन्ता और आशंका से भरा हुआ विचरण करता हूँ॥ 77॥ | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये हनुमान् आदि मेरे सचिव मुझ पर बहुत स्नेह करते हैं। इनके साथ रहते हुए भी मैं इस विशाल वन में चिन्ता और आशंका से भरा हुआ विचरण करता हूँ॥ 77॥
These Hanuman and other such great secretaries of mine are very fond of me. Even while staying with them I roam about in this vast forest in a state of anxiety and apprehension.॥ 77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥