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ramayan 4.11.75: उसके ऐसे-ऐसे कर्म देखे जा रहे हैं, जो देवताओं के लिए भी कठिन हैं और उन्हीं का विचार करके मैंने इस ऋष्यमूक पर्वत की शरण ली है।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  4.11.75 
दृश्यन्ते चास्य कर्माणि दुष्कराणि सुरैरपि।
यानि संचिन्त्य भीतोऽहमृष्यमूकमुपाश्रित:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उसके ऐसे-ऐसे कर्म देखे जा रहे हैं, जो देवताओं के लिए भी कठिन हैं और उन्हीं का विचार करके मैंने इस ऋष्यमूक पर्वत की शरण ली है।
 
Such deeds are seen of him which are difficult even for the gods and thinking about them, I have taken refuge in this Rishyamuka mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)