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ramayan 4.11.74: 'वालि वीर है और उसे स्वयं अपनी वीरता पर गर्व है। उसका बल और साहस प्रसिद्ध है। वह शक्तिशाली वानर आज तक युद्धों में कभी पराजित नहीं हुआ।' 74.   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  4.11.74 
शूरश्च शूरमानी च प्रख्यातबलपौरुष:।
बलवान् वानरो वाली संयुगेष्वपराजित:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
'वालि वीर है और उसे स्वयं अपनी वीरता पर गर्व है। उसका बल और साहस प्रसिद्ध है। वह शक्तिशाली वानर आज तक युद्धों में कभी पराजित नहीं हुआ।' 74.
 
‘Vaali is brave and he himself is proud of his bravery. His strength and courage are famous. That powerful monkey has never been defeated in the wars till now. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)