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ramayan 4.11.68: श्री राम! मैंने बालि का अतुलनीय पराक्रम प्रकट कर दिया है। हे पुरुषों के स्वामी! आप युद्ध में उस बालि को कैसे मार सकेंगे?॥68॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  4.11.68 
एतदस्यासमं वीर्यं मया राम प्रकाशितम्।
कथं तं वालिनं हन्तुं समरे शक्ष्यसे नृप॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! मैंने बालि का अतुलनीय पराक्रम प्रकट कर दिया है। हे पुरुषों के स्वामी! आप युद्ध में उस बालि को कैसे मार सकेंगे?॥68॥
 
Shri Ram! I have revealed the matchless valour of Vali. O Lord of men! How will you be able to kill that Vali in the battle?'॥ 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)