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ramayan 4.11.66: 'यह दुंदुभि की हड्डियों का ढेर है, जो किसी महान पर्वत शिखर के समान प्रतीत होता है। बल के अभिमान से युक्त वालि ने दुंदुभि के शरीर को इतनी दूर फेंक दिया था।' 66।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  4.11.66 
एषोऽस्थिनिचयस्तस्य दुन्दुभे: सम्प्रकाशते।
वीर्योत्सेकान्निरस्तस्य गिरिकूटनिभो महान्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
'यह दुंदुभि की हड्डियों का ढेर है, जो किसी महान पर्वत शिखर के समान प्रतीत होता है। बल के अभिमान से युक्त वालि ने दुंदुभि के शरीर को इतनी दूर फेंक दिया था।' 66।
 
‘This is the pile of Dundubhi's bones, which looks like a great mountain peak. Vali, being proud of her strength, had thrown Dundubhi's body so far. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)