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ramayan 4.11.65: श्री राम! मैं अपने मन्त्रियों सहित इस महान् वन में शोकरहित होकर विचरण करता हूँ।॥65॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  4.11.65 
तस्याप्रवेशं ज्ञात्वाहमिदं राम महावनम्।
विचरामि सहामात्यो विषादेन विवर्जित:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! मैं अपने मन्त्रियों सहित इस महान् वन में शोकरहित होकर विचरण करता हूँ।॥65॥
 
Shri Ram! Knowing that it is impossible for him to enter here, I, along with my ministers, roam about in this great forest, devoid of any sorrow. ॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)