Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.57: "मैंने अपने इस वन की सदैव पुत्र के समान रक्षा की है। जो लोग यहाँ रहकर इसके पत्ते और अंकुर नष्ट करेंगे तथा इसके फल और मूल को नष्ट करेंगे, वे अवश्य ही शापित होंगे। 57. | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"मैंने अपने इस वन की सदैव पुत्र के समान रक्षा की है। जो लोग यहाँ रहकर इसके पत्ते और अंकुर नष्ट करेंगे तथा इसके फल और मूल को नष्ट करेंगे, वे अवश्य ही शापित होंगे। 57.
"I have always protected this forest of mine like a son. Those who stay here to destroy its leaves and sprouts and to deprive it of its fruits and roots will surely be cursed. 57.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥