Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.55-56: "उस स्त्री के जो भी सचिव मेरे इस वन में रह रहे हैं, वे अब यह स्थान छोड़ दें। मेरी आज्ञा सुनकर वे प्रसन्नतापूर्वक चले जाएँ। यदि वे यहाँ रहेंगे, तो मैं उन्हें भी अवश्य ही शाप दूँगा।" 55-56. | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चास्य सचिवा: केचित् संश्रिता मामकं वनम्॥ ५५॥
न च तैरिह वस्तव्यं श्रुत्वा यान्तु यथासुखम्।
तेऽपि वा यदि तिष्ठन्ति शपिष्ये तानपि ध्रुवम्॥ ५६॥
अनुवाद
"उस स्त्री के जो भी सचिव मेरे इस वन में रह रहे हैं, वे अब यह स्थान छोड़ दें। मेरी आज्ञा सुनकर वे प्रसन्नतापूर्वक चले जाएँ। यदि वे यहाँ रहेंगे, तो मैं उन्हें भी अवश्य ही शाप दूँगा।" 55-56.
"Any secretaries of that lady who are living in this forest of mine should now leave this place. They should go away happily after listening to my orders. If they stay here, I will definitely curse them too. 55-56.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥