Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.54-55h: "वह दुष्ट मनुष्य, जिसने इस राक्षस के शरीर को यहाँ फेंक दिया है और इन वृक्षों को तोड़ डाला है, यदि मेरे आश्रम के चारों ओर एक योजन की भूमि पर पैर रखेगा, तो अवश्य ही उसके प्राण चले जाएँगे ॥ 54 1/2॥ | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षिपता पादपाश्चेमे सम्भग्नाश्चासुरीं तनुम्।
समन्तादाश्रमं पूर्णं योजनं मामकं यदि॥ ५४॥
आगमिष्यति दुर्बुद्धिर्व्यक्तं स न भविष्यति।
अनुवाद
"वह दुष्ट मनुष्य, जिसने इस राक्षस के शरीर को यहाँ फेंक दिया है और इन वृक्षों को तोड़ डाला है, यदि मेरे आश्रम के चारों ओर एक योजन की भूमि पर पैर रखेगा, तो अवश्य ही उसके प्राण चले जाएँगे ॥ 54 1/2॥
"If that wicked person, who has thrown this demon's body here and broken these trees, sets foot on the land of one Yojana around my hermitage, he will certainly lose his life. ॥ 54 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥